Workbook Answers of साखी - Hindi Sahitya Sagar.
Chapter.1 - “साखी ”
प्रश्न एवं उत्तर :-
1. गुरु गोबिंद दोऊ खड़े काके लागू पायें।
बलिहारी गुरु आपनो, जिन गोबिंद दियौ बताय ।
(क) प्रस्तुत दोहे के कवि का नाम लिखिए। इन्होंने अपने दोहों के माध्यम से समाज को क्या सीख दी है?
उत्तर- इस दोहे के कवि का नाम कबीरदास है, इस तोहे के माध्यम से कवि समाज को यह सीख देना चाहते है कि हमें अपने गुरु के चरणों में श्रध्दा, प्रेम और भक्ति से स्वयं को निछावर कर देना चाहिए क्योंकि गुरु ने ही हमे ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताया है, अतः गुरु का महत्व गोविन्द से भी अधिक है।
(ख) इनकी वाणी के संग्रह को किस नाम से जाना जाता है? उसके कौन-कौन से भाग हैं?
उत्तर- इनकी वाणी के संग्रह को 'बीजका' नाम से जाना जाता है, उसके तीन भाग है - साखी, सबद और रमैनी।
(ग) गुरु तथा गोबिंद में कवि ने किसे बड़ा बताया है तथा क्यों?
उत्तर- गुरु तथा गोविंद में कवि ने, गुरु को बड़ा बताया है क्योंकि गुरु ज्ञान प्रदान करते हैं, सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, मोह-माया से मुक्त कराते है और अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ईश्वर से मिलाते हैं। ईश्वर की कृपा तो गुरु - कृणा के बाद ही प्राप्त हो सकती हैं।
(घ) कवि किस पर बलिहारी है और क्यों? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- कवि अपने गुरु पर बलिहारी है क्योकि गुरु ने ही उन्हें ईश्वर प्राप्ति का मार्ग सुझाया यदि गुरु उसका मार्गदर्शन न करते तो वह ईश्वर तक न पहुँच पाते। गुरु ही ज्ञान प्रदान करने वाला तथा सही पथ - प्रदर्शक रहा। गुरु के समीप रहकर ही शिष्य विद्याध्ययन करते हैं। गुरु पुरी तरह से शिष्यों के शरीर, मन एवं आत्मा के सर्वोत्तम गुणों को प्रकट करने का कार्य करता है।
2. जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहि।
प्रेम गली अति साँकरी, तामे दो न समाहि ।
(क) 'जब मैं था तब हरि नहीं', 'मैं' का अर्थ स्पष्ट कीजिए। उसके होने पर कौन नहीं होता है और क्यों?
उत्तर- यहां 'मैं' का अर्थ अहंकार है। अहंकार होने पर मनुष्य ईश्वर को नही पा सकते क्योकि ईश्वर से मिलने पर मनुष्य का अहंकार भी मिट जाता है और वह ईश्वरमय हो जाता है।
(ख) 'साँकरी' शब्द का अर्थ लिखिए। यहाँ इस शब्द का प्रयोग क्यों किया गया है?
उत्तर- 'साँकरी' शब्द का अर्थ तंग है। यहां इस शब्द का प्रयोग किया गया है क्योकि प्रेम की गली अत्यधिक तंग है जहां ईश्वर और अहंकार दोनो एक साथ नहीं रह सकते हैं।
(ग) 'प्रेम गली' से कवि का क्या तात्पर्य है? उसकी क्या विशेषता है? उसमें कौन दो एक साथ नहीं रह सकते हैं और किस कारण से?
उत्तर- ' प्रेम गली' से कवि का यह तात्पर्य है कि ईश्वर से प्रेम करने का रास्ता। उसकी यह विशेषता है कि वह बहुत तंग है उसमें अहंकार और ईश्वर दोनों एक साथ नहीं रह सकते है क्योकि अहंकारी व्यक्ति कभी भगवान को नहीं पा सकता।
(घ) इस दोहे के माध्यम से कवि हमें क्या संदेश दे रहे हैं?
उत्तर- इस दोहे के माध्यम से कवि हमें यह संदेश देना चाहते है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए मनुष्य को अहंकार का त्याग करना पड़ेगा और ईश्वर का अर्थ प्रेम है, परंतु जहाँ सच्चा प्यार है वहाँ अहंकार
नहीं हो सकता है।
3. काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय ।
ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय ।।
(क) कबीरदास जी के जीवन के विषय में पाँच पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर- कबीरदास जी अपने समय के प्रसिद्ध एवं उच्च कोटि के सन्त थे, उनका जन्च सन् 1398 में वाराणसी में हुआ था। इनकी वाणी के संग्रह को 'बीजक' कहां जाता है। कबीरदास की रचनाएँ तीन प्रकार की है- साखी, सबद और रमैनी। इनकी मृत्यु 1495 मे मगहर मे हुई।
(ख) कवि मुसलमानों द्वारा मस्जिदों में ज़ोर-ज़ोर से अज़ान पढ़ने का उपहास किस प्रकार करते हैं?